गेहूं की आखिरी सिंचाई का सही समय और सही तरीका क्या है | गेहूं में चाहते हो अधिक पैदावार तो देखे यह रिपोर्ट

गेहूं की आखिरी सिंचाई का सही समय और सही तरीका क्या है | गेहूं में चाहते हो अधिक पैदावार तो देखे यह रिपोर्ट

किसान साथियों, देश की कृषि में गेहूं की फसल का बहुत बड़ा योगदान है। गेहूं की फसल के बढ़ने के हर चरण में सिंचाई की जरूरत होती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गेहूं की आखिरी सिंचाई का समय क्या होना चाहिए? यह सवाल अक्सर किसानों के मन में रहता है। गेहूं की फसल में बाली निकलने के बाद सिंचाई करने का महत्व बहुत अधिक बढ़ जाता है। इस रिपोर्ट में हम विस्तार से समझेंगे कि गेहूं की आखिरी सिंचाई कब करनी चाहिए, इसके लाभ क्या हैं, और इसे करने का सही तरीका क्या है। यह जानकारी आपको न केवल गेहूं की फसल से बेहतर पैदावार प्राप्त करने में मदद करेगी, बल्कि आपके खेत की मिट्टी की सेहत को भी बनाए रखेगी। इसलिए इस रिपोर्ट को अंत तक ध्यानपूर्वक पढ़ें, ताकि आप गेहूं की फसल से अधिकतम लाभ उठा सकें। तो चलिए गेहूं की आखिरी सिंचाई के बारे में विस्तार से जानने के लिए पढ़ते हैं यह रिपोर्ट।

गेहूं में बाली निकलने के बाद सिंचाई

साथियों, जब गेहूं की फसल में बालियां निकलने लगती हैं, तो यह समय फसल के जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। गेहूं की बालियां जैसे-जैसे बढ़ती हैं, पौधों की पोषण की आवश्यकता भी बढ़ जाती है। अगर इस समय पर सिंचाई सही तरीके से नहीं की जाती, तो इससे फसल की गुणवत्ता और पैदावार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। बाली निकलने के बाद सिंचाई का उद्देश्य पौधों को पर्याप्त नमी प्रदान करना है। बालियों का सही तरीके से विकास और दाने का आकार बढ़ाने के लिए मिट्टी में नमी बनाए रखना जरूरी है। सही समय पर सिंचाई न करने से पौधों की वृद्धि धीमी हो सकती है, जिससे फसल कमजोर हो जाती है। इस समय पर सिंचाई करने से गेहूं की फसल में दाने अच्छे से बनते हैं और उनका आकार भी बढ़ता है, जिससे फसल की गुणवत्ता में सुधार होता है।

सिंचाई के सही समय का चयन

साथियों, गेहूं की फसल में बीज अंकुरण से लेकर बाजार तक, गेहूं की फसल को सही तरीके से बढ़ाना और उसे समय पर सिंचाई देना किसान के लिए महत्वपूर्ण होता है। गेहूं की फसल में बाली निकलने के बाद सिंचाई के लिए सही समय का चुनाव करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। इस समय में किसान यह निर्णय लेते हैं कि कब सिंचाई की जानी चाहिए, ताकि फसल से अधिकतम पैदावार प्राप्त हो सके। सिंचाई का सही समय वह होता है जब गेहूं की बालियां पूरी तरह से निकल चुकी होती हैं और फूल की अवस्था शुरू हो जाती है। यह वह समय है जब पौधों को पानी की अत्यधिक आवश्यकता होती है। इस समय सिंचाई करने से पौधों को न केवल पानी मिलता है, बल्कि पौधों की जड़ें भी स्वस्थ रहती हैं, और दाने का विकास सही तरीके से होता है। हालांकि, जब तेज हवाएं चलने लगती हैं, तो सिंचाई में कुछ सावधानी बरतनी चाहिए। तेज हवाओं के कारण सिंचाई करने से पानी जल्दी वाष्पित हो सकता है, जिससे गेहूं की फसल गिरने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए इस समय में दिन में सिंचाई करने से बचना चाहिए और शाम या रात में सिंचाई करना बेहतर होता है।

माहू और कीटनाशक का ध्यान रखना

साथियों, गेहूं की फसल में बाली निकलने के बाद माहू (aphid) की समस्या बढ़ने लगती है। गेहूं की फसल में माहू (एफिड) एक आम समस्या है, यह एक प्रकार का कीट है जो पौधों के रस चूसकर उन्हें नुकसान पहुंचाती है। जिससे पौधों की वृद्धि पर असर पड़ता है। माहू का प्रकोप गेहूं की फसल को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे पैदावार में कमी आ सकती है। यह कीट हल्के पीले से गहरे हरे रंग का होता है और पत्तियों के अंदर छिपकर रहता है। माहू के कारण पत्तियां पीली पड़ सकती हैं और सूखने लगती हैं। माहू रस चूसकर पौधों को कमजोर बना देते हैं। माहू के कारण फसल में रोग फैलने का भी खतरा रहता है, इसलिए कीट की पहचान जल्द से जल्द करें, ताकि समय रहते उपचार किया जा सके। इसके उपचार के लिए एक लीटर नीम तेल प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। यदि आप कीटनाशकों का प्रयोग करते हैं तो इमिडाक्लोप्रिड 250 मिलीग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। इसके अलावा फसल चक्र का पालन करें, जिससे माहू की आबादी कम हो सके। अगर माहू का प्रकोप बढ़ जाए, तो इन कीटनाशकों को बाली निकलने के बाद या फूल की अवस्था में डाला जा सकता है, ताकि ये कीट पूरी तरह से समाप्त हो जाएं। ध्यान रखें कि कीटनाशकों का छिड़काव सही समय पर किया जाए ताकि इसका प्रभाव अधिकतम हो सके।

सिंचाई करने के लाभ

साथियों, फसल में सही समय पर सिंचाई करने के बहुत सारे लाभ होते हैं। सबसे पहला लाभ यह है कि यह पौधों को पर्याप्त नमी प्रदान करता है, जिससे उनका विकास स्वस्थ तरीके से होता है। सही समय पर सिंचाई करने से पौधों के अंदर पोषक तत्वों का विनिमय सही तरीके से होता है, जो कि दाने के भरने में मदद करता है। इसके अलावा, पानी का सही प्रबंधन करने से खेत की मिट्टी में नमी बनी रहती है, और इससे गेहूं की फसल मजबूत और स्वस्थ बनती है। अगर आप सिंचाई को समय पर करते हैं, तो गेहूं के दाने का आकार बढ़ता है और दाने मजबूत होते हैं। इससे पैदावार में 5 से 10 प्रतिशत तक का सुधार हो सकता है। साथ ही, फसल गिरने का खतरा भी कम हो जाता है, जो तेज हवाओं के कारण बढ़ सकता है।

अंतिम सिंचाई कब करें

दोस्तों, आखिरी सिंचाई वह होती है जब गेहूं के दाने का भराव होने लगता है। यह समय गेहूं के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि दाने का आकार बढ़ने लगता है और यह फसल की गुणवत्ता को निर्धारित करता है। जब दाने का हल्का रंग बदलने लगे, और बाली में हल्का पीला रंग दिखाई देने लगे, तो यह संकेत है कि अब आपको आखिरी सिंचाई करनी चाहिए। इस समय पर सिंचाई करने से दाने अच्छे से भरते हैं और उनका आकार बड़ा होता है। अगर आपने इस समय सिंचाई सही तरीके से की, तो गेहूं के दाने मोटे, मजबूत और उच्च गुणवत्ता वाले होते हैं। यह न केवल आपकी पैदावार को बढ़ाता है, बल्कि आपके खेत की मिट्टी की सेहत भी बनाए रखता है।

सिंचाई की अन्य महत्वपूर्ण बातें

साथियों, गेहूं की फसल में सिंचाई करने से पहले आपको सिंचाई से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बातों के बारे में जानकारी होना भी आवश्यक है, इसलिए आपको फसल की गुणवत्ता और मिट्टी की सेहत बनाए रखने के लिए सिंचाई का सही समय जानना बहुत महत्वपूर्ण है। सिंचाई के दौरान कीटनाशक और उर्वरक का सही उपयोग भी फसल की सेहत को बनाए रखने में मदद करता है। ध्यान रखें कि सिंचाई मौसम के अनुसार की जाए। जब हवा तेज हो, तो दिन में सिंचाई से बचें, और जब हवा शांत हो, तो सिंचाई करना लाभकारी होता है।

नोट: रिपोर्ट में दी गई सभी जानकारी किसानों के निजी अनुभव और इंटरनेट पर मौजूद सार्वजनिक स्रोतों से इकट्ठा की गई है। संबंधित किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृषि विशेषज्ञों की सलाह अवश्य लें।

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