किसान साथियो और व्यापारी भाइयो होली का त्यौहार नजदीक आने के साथ ही, मंडियों में बासमती धान की आवक में एक दिलचस्प रुझान देखने को मिल रहा है। आमतौर पर, होली के समय तक बासमती धान की आवक लगभग समाप्त हो जाती है। हालांकि, इस बार उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की मंडियों में अभी भी धान की आवक जारी है, जो एक असामान्य स्थिति है। इसके विपरीत, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली की मंडियों में आवक बहुत ही सीमित है। पिछले सप्ताह के कारोबार में बासमती के बाजार का विश्लेषण करने पर, मिलर्स और निर्यातकों की मांग के परिणामस्वरूप धान और चावल की कीमतों में 100 से 200 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि दर्ज की गई। यह वृद्धि पूरे सप्ताह के दौरान देखी गई, जो बाजार में मजबूत मांग का संकेत देती है। लेकिन निर्यात मांग कमजोर होने से भाव फिर से डाउन होना शुरू हो चूका है हरियाणा की गोहाना मंडी में 1121 का भाव 4300 छूके 4270 रूपये तक रह गया है
मंडियों में क्या मिल रहे है भाव
दिल्ली की नरेला मंडी में धान की आवक में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जहाँ प्रतिदिन 5-10 हजार बोरियों की आवक हो रही है। इसके साथ ही, धान के भाव में भी सुधार देखने को मिला है। धान 1121 का भाव 100 रुपये बढ़कर 4100 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है, जबकि 1509 हाथ का भाव 155 रुपये बढ़कर 2655 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। नजफगढ़ मंडी में सीमित आवक के कारण 50 रुपये की तेजी दर्ज हुई है। अन्य मंडियों में, जैसे कि भाटापाड़ा, राजिम, अमृतसर, फाजिल्का, तरनतारन और दनकौर, धान की आवक नगण्य रही और कीमतें पूर्व स्तर पर स्थिर रहीं। इसके विपरीत, एटा, मैनपुरी, जहांगीराबाद, अलीगढ़, गोरखपुर, शाहजहांपुर और खैर जैसी मंडियों में सामान्य कारोबार के बीच धान की विभिन्न किस्मों के दाम में 100-200 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी और मंदी दोनों देखी गई। हरियाणा की मंडियों में धान की आपूर्ति में कमी देखी गई, और तरावड़ी मंडी में धान के भाव स्थिर रहे। गोहाना मंडी में 1121 धान का सबसे अधिक भाव 4270 रुपये प्रति क्विंटल रहा, और पूरे सप्ताह में लगभग 80 रुपये की तेजी दर्ज की गई लेकिन फिलहाल भाव में 30 रूपये की गिरावट देखी गई है। जुलाना मंडी में भी 1121 धान में 60 रुपये तक की तेजी देखने को मिली। 1401 धान के भाव में मंदी का रुझान रहा, रतिया मंडी में 1401 का भाव पिछले सप्ताह के 3201 रुपये से घटकर 3121 रुपये रह गया। हालांकि, सिरसा मंडी में 1401 का भाव 3200 रुपये से बढ़कर 3283 रुपये हो गया। मध्य प्रदेश की मंडियों में पीबी और 1886 धान की आवक जारी है, और अच्छी गुणवत्ता वाले पीबी धान का भाव 2600 से 2680 रुपये प्रति क्विंटल तक है, जबकि 1886 धान का भाव 2900 रुपये तक मिल रहा है।
फिर से क्यों गिरा रहे है धान के भाव
वर्तमान में, भारत के चावल निर्यात मांग में कुछ गिरावट देखी जा रही है। इसका मुख्य कारण वैश्विक बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और रमजान के महीने को माना जा रहा है। बासमती चावल के निर्यात में भारत को पाकिस्तान से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, जबकि गैर-बासमती सफेद और सेला चावल के निर्यात में थाईलैंड, वियतनाम, पाकिस्तान और म्यांमार जैसे देश भी प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। हालांकि, भारत सरकार ने टूटे चावल (ब्रोकन राइस) के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया है, जिससे इस चावल की कीमतों में तेजी आने की संभावना है। यह निर्णय इसलिए लिया गया है क्योंकि सरकारी गोदामों में चावल का भंडार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। सितंबर 2022 से लगे इस प्रतिबंध के हटने से बासमती के टूटे चावल को भी थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। 1718 सेला चावल की मांग में भी पिछले कुछ दिनों की सुस्ती के बाद अब वृद्धि देखी जा रही है। यही वजह है कि 1718 चावल की कीमतें, जो पहले 5200 रुपये तक गिर गई थीं, अब बढ़कर 5550 रुपये तक पहुंच गई हैं। बाकि व्यापार अपने विवेक से करे