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किसानों के लिए खुशखबरी | समाप्त हुई मिलर्स की हड़ताल | आज से बासमती धान की खरीद शुरू

बासमती में आज बन सकती है तेजी

किसान साथियो साथियों लगातार चार दिनों तक चली गहमागहमी के बाद आखिरकार बासमती के किसानों को थोड़ी सी राहत मिली है। हरियाणा प्रदेश में आढ़ती संगठन और बासमती चावल निर्यात संगठन ने मिलकर यह निर्णय लिया है कि आज 20 अक्टूबर से आढ़तियों और चावल मिलों की हड़ताल समाप्त कर दी जाएगी। और चावल मिलर्स की बासमती की खरीद शुरू हो जाएगी। बासमती चावल निर्यात संगठन ने एक ऑडियो संदेश के द्वारा आई है जानकारी दी है। मंडी भाव टुडे ने इस खबर को अन्य विश्वसनीय स्रोतों से वेरीफाई भी कर लिया है । संगठन का कहना है कि किसानों के नुकसान को देखते हुए उनके हित में यह फैसला लिया गया है । इस निर्णय के बाद आज से ही बासमती चावल की खरीद शुरू हो जाएगी । संगठन ने किसानों से बासमती की फसल को मंडियों में लाने का आग्रह किया है । आज की रिपोर्ट में हम इस पूरे मामले को विस्तर से समझेंगे WhatsApp पर भाव देखने के लिए हमारा ग्रुप जॉइन करें

क्या है पूरा मामला
दरअसल भारत सरकार को बासमती चावल के निर्यात संबंध में काफी शिकायतें मिल रही थी । शिकायत यह मिल रही थी कि बासमती चावल के नाम पर गैर बासमती सफेद चावल, जिस के निर्यात पर सरकार ने प्रतिबंध लगा रखा है, उसे निर्यात किया जा रहा था। मामले पर संज्ञान लेते हुए सरकार ने 25 अगस्त 2023 को एक आदेश जारी किया जिसमें बासमती धान के न्यूनतम निर्यात मूल्य को 1200 डॉलर प्रति टन निर्धारित कर दिया। क्योंकि गैर बासमती सफेद चावल कीमत कम होने के कारण इस मूल्य में निर्यात नहीं हो सकता इसलिए मिलावटी चावल के निर्यात पर अंकुश लग गया।

भारत सरकार ने इस आदेश को 15 अक्टूबर तक की अवधि के लिए लागू किया था। जिसका 15 अक्टूबर को रिव्यू होना था। उम्मीद लगायी जा रही थी कि 15 अक्टूबर के बाद इस लिमिट को समाप्त कर दिया जाएगा। क्योंकि इस समय किसानों का बासमती धान मंडियों में आना शुरू हो जाता है। लेकिन सरकार ने 14 अक्टूबर को एक निर्णय लिया जिसमें बासमती के न्यूनतम निर्यात मूल्य को $1200 पर ही बरकरार रखा। जिसके कारण निर्यातक और मिलर्स नाराज हो गए।

क्यूँ नाराज हुए निर्यातक
किसान साथियों बासमती धान के अगर भाव की बात करें तो 1121 और 1718 जैसी ऊंची वैरियटयों के सेला क्वालिटी में अंतर्राष्ट्रीय भाव इस समय $900 से 1000 डॉलर के आसपास चल रहे हैं। $1200 के हिसाब से भारतीय चावल को ग्राहक नहीं मिल रहे थे। अन्य वैरायटी जैसे 1509 पूसा बासमती 1 और 1692 जैसी वैरायटी ओके चावल तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में 600 से 800 डॉलर में ही निर्यात हो पाते हैं। चूंकि सरकार ने 1200 डॉलर से कम मूल्य में बासमती के निर्यात की अनुमति नहीं दी इसलिए यह चावल निर्यात नहीं हो पा रहा था । अब चावल निर्यातकों को यह समस्या हुई कि जब वह चावल को निर्यात ही नहीं कर पा रहे हैं तो फिर ऐसे में किसानों से धान खरीद कैसे करें। इसलिए निर्यातकों ने सरकार के MEP की अवधि बढ़ाने के आदेश के प्रति अपना विरोध जताने के लिए बासमती की खरीद को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया।

किसानों को हो रहा था भारी नुकसान
मिल्स की बासमती धान की खरीद बंद होने से किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा था। 14 अक्टूबर को जो बासमती 1509 मंडियों में 3800 प्रति क्विंटल तक बिक रहा था वह 15 तारीख को 3000 की रेंज में आ गया। एक एक बासमती के भाव गिरने के कारण किसान भी सरकार के इस निर्णय से खासे नाराज चल रहे थे।

मीटिंग में लिया फैसला
विजय सेतिया के ऑडियो संदेश के अनुसार गुरुवार को ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर संगठन के प्रेसिडेंट और अन्य मेंबर्स ने श्री संजीव चोपड़ा (सेक्रेटरी, डिपार्टमेंट ऑफ़ फ़ूड एंड पब्लिक डिसटीब्यूशन मिनिस्ट्री ऑफ़ कंस्यूमर अफेयर्स) से मुलाकात की। संदेश में बताया गया है कि मुलाकात के दौरान श्री संजीव चोपड़ा ने एक्सपोर्टर को MEP को कम करने का आश्वासन दिया है। इसके बाद ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर संगठन की गवर्निंग बॉडी की मीटिंग हुई और जिसमें किसानों को नुकसान हो रहे नुकसान को देखते हुए यह निर्णय लिया गया कि हड़ताल को समाप्त कर के बासमती की खरीद शुरू की जाए। 27 अक्टूबर को दोबारा मीटिंग करने की बात भी कही गई है जिसमें आगे की दिशा दशा तय की जाएगी।

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About the Author
मैं लवकेश कौशिक, भारतीय नौसेना से रिटायर्ड एक नौसैनिक, Mandi Market प्लेटफार्म का संस्थापक हूँ। मैं मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिले का निवासी हूँ। मंडी मार्केट( Mandibhavtoday.net) को मूल रूप से पाठकों  को ज्वलंत मुद्दों को ठीक से समझाने और मार्केट और इसके ट्रेंड की जानकारी देने के लिए बनाया गया है। पोर्टल पर दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त की गई है।

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